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ट्रिपल तलाक: पढ़ें मोदी सरकार के विधेयक ‘द मुस्लिम वूमेन प्रोटक्शन ऑफ राइट्स इन मैरिज एक्ट’ के सभी प्रावधान

'मुस्लिम वीमेन प्रोटेक्शन ऑफ राइट्स ऑन मैरिज बिल' जम्मू-कश्मीर को छोड़कर पूरे देश में लागू होगा।

Union Cabinet clears Bill on instant triple talaq Breaking News देश समाचार 

'मुस्लिम वीमेन प्रोटेक्शन ऑफ राइट्स ऑन मैरिज बिल' जम्मू-कश्मीर को छोड़कर पूरे देश में लागू होगा।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्‍यक्षता में शुक्रवार को हुई कैबिनेट की बैठक में तीन तलाक के खिलाफ ‘द मुस्लिम वूमेन प्रोटक्शन ऑफ राइट्स इन मैरिज एक्ट’ को मंजूरी मिल गई। इसके तहत तीन तलाक (बोलकर, लिखकर या ईमेल, एसएमएस और व्हाट्सएप जैसे इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से) को गैरकानूनी एवं अमान्य ठहराया जाएगा और ऐसे करने वाले पति को तीन साल जेल की सजा होगी। मोदी सरकार अब इस बिल को संसद की मंजूरी के लिए दोनों सदनों में रखेगी और दोनों सदनों से पास होने के बाद यह कानून बन जाएगा। माना जा रहा है कि सरकार इसे संसद के चालू शीतकालीन सत्र में पारित करवाने की कोशिश करेगी। गौरतलब है कि बीते 22 अगस्त को उच्चतम न्यायालय ने एक बार में तीन तलाक को गैरकानूनी और असंवैधानिक करार दिया था।

प्रस्तावित ‘द मुस्लिम वूमेन प्रोटक्शन ऑफ राइट्स इन मैरिज एक्ट’  की खास बातें

  1. इस मसौदे को गृह मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता वाले एक अंतर-मंत्री समूह ने तैयार किया है। इस समूह में वित्त मंत्री अरूण जेटली, विदेश मंत्री सुषमा स्वराज, कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद और कानून राज्य मंत्री पी पी चौधरी शामिल थे।
  2. इसके तहत एक बार में तीन तलाक (तलाक-ए-बिद्दत) को गैरकानूनी एवं अमान्य ठहराया जाएगा और ऐसे करने वाले पति को तीन साल जेल की सजा होगी।
  3. किसी भी तरह का तीन तलाक (बोलकर, लिखकर या ईमेल, एसएमएस और व्हाट्सएप जैसे इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से) गैरकानूनी होगा।
  4. ट्रिपल तलाक गैरजमानती अपराध होगा। यानी पति अगर पत्नी को ट्रिपल तलाक देता है तो उसे तीन साल की सजा होगी और इस दौरान उसे जमानत भी नहीं मिलेगी।
  5. ‘मुस्लिम वीमेन प्रोटेक्शन ऑफ राइट्स ऑन मैरिज बिल’ प्रस्तावित कानून में पीड़िता को अपने पति से हर्जाना मांगने का भी अधिकार होगा।
  6. प्रस्तावित कानून के तहत पीड़ित महिला मजिस्ट्रेट से नाबालिग बच्चों के संरक्षण का भी अनुरोध कर सकती है और मजिस्ट्रेट इस मुद्दे पर अंतिम फैसला करेंगे।
  7. प्रस्तावित कानून पीड़िता को अपने तथा नाबालिग बच्चों के लिए गुजारा भत्ता मांगने के लिए मजिस्ट्रेट से गुहार लगाने की शक्ति देगा।
  8. प्रस्तावित कानून जम्मू-कश्मीर को छोड़कर पूरे देश में लागू होगा।
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